मदर इंडिया फ़िल्म की शूटिंग किस गांव में हुई थी

आज हम आपको बताने वाले हैं मदर इंडिया फिल्म के शूटिंग लोकेशन के बारे में आपने बहुत सारे आर्टिकल न्यूज़ वीडियो देखे होंगे लेकिन सटीक जानकारी किसी ने नहीं दी होगी आपको बता दें गुजरात राज्य के बड़ोदरा जिले में एक गांव है काशीपूरा सरार इसी गांव में फिल्माई गई थी मदर इंडिया फिल्म हालांकि मदर इंडिया फिल्म के और कई सीन दूसरी जगह से भी फिल्मआए गए हैं लेकिन ज्यादातर सीन इसी गांव से फिल्माए गए थे

फिल्म - मदर इंडिया (1957)

शूटिंग लोकेशन - काशीपुरा सरार वडोदरा गुजरात

जब हमारी टीम काशीपुरा सरार पहुंची तो वहां जाकर देखा बहुत सारे लोकेशन आज भी उसी तरीके से मौजूद हैं हम आपको बता देते हैं यहां के गांव वालों ने अपनी आंखों से शूटिंग होते हुए अच्छी आपको बता देते हैं यह फिल्म अपने जमाने की एक ऐसी फिल्म थी जिसे ऑस्कर में नॉमिनेट किया गया मदर इंडिया फिल्म में एक ग्रामीण औरतों का किरदार दिखाया गया जो किसी भी परिस्थिति में अपने परिवार का पोषण करेगी गरीबी और अन्याय से जूझते हुए अपने बच्चों को सत्य के रास्ते पर चलना सिखाती है

  • इसी फिल्म की वजह से सुनील दत्त की शादी हुई थी

आपको याद होगा फिल्म के अंदर एक सीन आता है जब सभी किसान लोग मिलकर एक खुले मैदान में अपनी फसल इकट्ठा करते हैं उसे फसल को धूप में सुखाते हैं इस दौरान फिल्म के क्लाइमेक्स में आग लगाने का सीन दिखाया जाता है लेकिन वह आग असल में लग जाती है जैसा कि आपने देखा होगा फिल्म में आग लगने के बाद में नरगिस दत्त को लेकर सुनील दत्त उसे तालाब में कूदते हैं वह तो फिल्म में सीन दिखाया गया था हालांकि रियल में नरगिस दत्त को आग लग जाती है और सुनील दत्त उसे तालाब में लेकर उनको कूदते हैं तो ऐसे में नरगिस दत्त ने कहा कि जिसे जान बचाई है वह असल में मेरे जीवन या मेरे जीवन साथी का हकदार वही है

  • फिल्मफेयर अवार्ड

इस फिल्म ने कई फिल्मफेयर अवार्ड जीते
इस फिल्म का नाम ऑस्कर अवार्ड में चयनित हुआ आपको बता देते हैं एक दिलचस्प किस्सा जब समुद्र के रास्ते ऑस्कर में 9 मिनट होने के लिए फाइल जा रही थी तो समुद्र में नमी होने के कारण मदर इंडिया फिल्म के जो कागज थे जो नॉमिनेशंस के लिए जा रहे थे अमेरिका वह गीले हो गए थे फिर भारत सरकार ने दोबारा से तुरंत रिकॉपी तैयार कर कर अमेरिका भेजी थी तब जाकर ऑस्कर में नाम दर्ज हुआ था भारत की पहली फिल्म थी जो ऑस्कर में नॉमिनेट हुई थी

  • 28 साल की उम्र में नर्गिस ने 70 साल की मां किरदार निभाया था

बहुत मेहनत करनी पड़ रही थी क्योंकि उसे समय नरगिस की महज उम्र 28 साल थी जिसमें उनका किरदार 60 साल से ऊपर की महिला का दिखाया गया था आपने फिल्म में देखा होगा आपको किसी भी एंगल से नहीं लगेगा कि उनकी उम्र महज 28 साल हो ऐसा प्रतीत होता है कि उनकी उम्र 60 से 70 वर्ष के बीच में नजर आती फिल्म के डायरेक्टर महबूब खान ने बताया था जब राधा ( नरगिस) अपने बेटे (सुनील दत्त) को गोली मारती है तब पूरा फिल्म का सेट रो पड़ा था फिल्म का सीन ही कुछ ऐसा था महबूब खान ने बताया कि मैं फिल्म नहीं बनाई है हमने अपनी भारत मां का चित्र दिखाया है फिल्म में उतार कर

  • Kashipura sarar Vadodara Gujarat shooting mother India

काशीपुरा शरार मैं फिल्म इसलिए सूट हुई थी क्योंकि डायरेक्ट महबूब खान का यह गांव हुआ करता था इसी गांव में महबूब खान का घर था 1940 में इससे पहले एक फिल्म बनाई थी औरत इस फिल्म का रीमेक यह फिल्म थी

नरगिस ने इस फिल्म को सुपरहिट होने के बाद में फिल्म का बड़ा कमाई का हिस्सा महिलाओं को दान कर दिया था उनकी पढ़ाई लिखाई के लिए यह पैसा उन्होंने दान किया था उन्होंने कहा था यह फिल्म हमारी फिल्म नहीं है यह भारत माता की हर वह औरत की फिल्म है

सिर्फ मेरी फिल्म नहीं है हर भारतीय मां की फिल्म है जिसमें एक झलक छुपी हुई है

इस पूरी फिल्म के दौरान नरगिस दत्त ने कोई भी मेकअप नहीं किया था सिर्फ चेहरे पर थोड़ी मिट्टी लगा दी जाती थी और फिल्म की शूटिंग स्टार्ट हो जाती थी खुद महबूब खान ने इस फिल्म के लिए खेतों में पानी लगाकर हल चलाया उन दिनों में बैलों से हल चलाया जाता था तब जाकर एक यह फिल्म बनी

  • गांव वालो की माने

जब हमारे द्वारा गांव वालों से पूछा गया तब गांव के प्रधान ने बताया कि जब मैं लगभग 7 8 साल का था तब मैं फिल्म की शूटिंग देखने के लिए चुपके से जाता था और घर वालों को लगता था कि मैं स्कूल गया हूं लेकिन स्कूल में बसता रखकर फिल्म देखने की चला जाता था कभी कबार तो स्कूल जाता ही नहीं था फिल्म शूटिंग ही देखता रहता था लगभग इस गांव में 70% फिल्म की शूटिंग हुई थी यहां पर सारे सीन फिल्म आ जाते हैं जब वह बैलगाड़ी से जाते रहते हैं तो गांव वाले बोलते हैं कि वह असल में बैलगाड़ी का पहिया निकल गया था उन्होंने जो किरदार निभाए वह सारे किरदार देख वहीं पर मेकअप आर्टिस्ट मेकअप किया करते थे उसी गांव में रहा करते थे और गांव वालों से इतना घुल मिल गए थे कि यह फिल्म आईकॉनिक फिल्म बन गई आज भी लोग उसे फिल्म को याद करके उनकी आंखों में आंसू आ जाते हैं वह लोग कह रहे थे कि अब ऐसी फिल्म दोबारा नहीं बन सकती वह दौर कुछ और था यह दौर कुछ और है

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